सावन माह के दौरान शुक्ल पक्ष का हो रहा है आरम्भ हो अब इस का असर दिखाएगा प्रमुख व्रत त्यौहार जो की होने वाला है बहुत खास इस शुक्ल पक्ष के विशेष व्रत त्यौहार।
हिन्दू पंचांग के अनुसार सावन माह आरम्भ हो चूका है जो भवगान शिव को समर्पित अत्यंत पवित्र और पुण्यकारी महीना माना जाता है आज से शुक्ल पक्ष की होगी शुरुआत जो आध्यात्मिक साधना ,व्रत , उपवास और शिवभक्ति का प्रमुख समय होता है। इस महा में भक्तगण शिवलिंग पर जलाभिषेक करते है , बेलपत्र धतूरा , आक आदि चढ़ाते हैं और नमः शिवाय का जॉब करते है। ऐसा माना है की इस माह में भगवान शिव की पूजा अत्यंत फलदायी होती है भक्तो की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं |

सावन माह शुक्ल पक्ष 2025
पंचांग के अनुसार वर्ष 2025 में सावन माह के शुक्ल पक्ष की शुरुआत 25 जुलाई को शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से हो जाएगी। यह शुक्ल पक्ष 9 अगस्त 2025 को शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि के तक रहेगा। इस अवधि में चार सावन सोमवार पड़ेंगे, जिन्हें खास महत्व प्राप्त है। विशेषकर कुंवारी कन्याएं अच्छे पति की कामना से इस व्रत को करती हैं जबकि विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखमय दांपत्य जीवन के लिए उपवास करती हैं।
श्रावण माह में आने वाले शुक्ल पक्ष के दौरान प्रमुख व्रत और त्योहार
25 जुलाई 2025: चंद्र दर्शन – यह तिथि चंद्रमा के प्रथम दर्शन के लिए मानी जाती है।
26 जुलाई 2025: हरियाली तीज – सुहागिन महिलाओं का प्रमुख पर्व, जहां वे शिव-पार्वती की पूजा कर अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं।
28 जुलाई 2025: सावन का तीसरा सोमवार, साथ ही विनायक चतुर्थी और नाग पंचमी का पर्व।
29 जुलाई 2025: तीसरा मंगलवार मंगला गौरी व्रत, कल्कि जयंती भगवान विष्णु के दसवें अवतार के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है।
30 जुलाई 2025: स्कंद षष्ठी – भगवान कार्तिकेय की पूजा का दिन।
31 जुलाई 2025: तुलसीदास जयंती – महान संत कवि तुलसीदास का जन्मोत्सव।
1 अगस्त 2025: मासिक दुर्गाष्टमी – देवी दुर्गा की मासिक पूजा।
4 अगस्त 2025: चौथा सावन सोमवार – शिव आराधना का विशेष दिन।
5 अगस्त 2025: मंगला गौरी व्रत, पुत्रदा एकादशी जो संतान प्राप्ति हेतु व्रत होगा, दामोदर द्वादशी।
6 अगस्त 2025: बुध प्रदोष व्रत – भगवान शिव को समर्पित।
8 अगस्त 2025: वरलक्ष्मी व्रत – महिलाओं का सौभाग्यदायक व्रत, हयग्रीव जयंती।
9 अगस्त 2025: रक्षाबंधन – भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक पर्व।
सावन माह के शुक्ल पक्ष अनुसार संपूर्ण श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक होता है। यह समय आत्मशुद्धि, उपवास, ध्यान और दान का होता है। इस माह में भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने हेतु व्रत-उपवास का विशेष महत्व होता है। धार्मिक दृष्टिकोण से यह माह सभी के लिए कल्याणकारी और जीवन में शुभता लाने वाला होता है।






