नई दिल्ली।
देश की सबसे बड़ी अदालत ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए देश के लाखों अनाथ बच्चों को शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत शामिल करने का निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय पीठ — न्यायाधीश बी. वी. नागरत्ना और के. वी. विश्वनाथन — ने स्पष्ट किया कि अब सभी राज्य सरकारें अनाथ बच्चों को उनके नजदीकी स्कूलों में दाखिले के लिए नियम बनाएंगी और इसके लिए उन्हें चार सप्ताह के भीतर सरकारी आदेश (G.O.) जारी करना होगा।
यह फैसला सामाजिक कार्यकर्ता और अधिवक्ता पौलोमी पाविनी शुक्ला द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई के दौरान आया। उन्होंने अपनी याचिका में अनाथ बच्चों को शिक्षा के अधिकार अधिनियम के दायरे में लाने की मांग की थी।
“राज्य है पालक, निभाए अपनी जिम्मेदारी”
न्यायालय ने अपने आदेश में बेहद संवेदनशील रुख अपनाते हुए कहा कि जब किसी बच्चे के माता-पिता नहीं होते, तो राज्य की नैतिक और संवैधानिक जिम्मेदारी बनती है कि वह उस बच्चे की शिक्षा और देखभाल सुनिश्चित करे। अदालत ने इस संदर्भ में ‘Parens Patriae’ यानी ‘पालक राज्य’ की अवधारणा का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य को ऐसे बच्चों का संरक्षक बनना होगा।
सर्वे और आंकड़े जुटाने का भी आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को यह भी निर्देश दिया कि वे यह सर्वेक्षण करें कि उनके-अपने प्रदेशों में कितने अनाथ बच्चे अब भी स्कूल से बाहर हैं। इसके साथ ही, उनकी शिक्षा की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। संविधान के अनुच्छेद 51 का उल्लेख करते हुए अदालत ने कहा कि राज्य का कर्तव्य है कि वह प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करे।
जनगणना में शामिल होंगे अनाथ बच्चे
याचिकाकर्ता पौलोमी पाविनी शुक्ला ने अदालत से आग्रह किया कि देश में चल रही जनगणना में अनाथ बच्चों की गिनती अनिवार्य रूप से की जाए। इस पर केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल ने सकारात्मक जवाब देते हुए कहा कि इस दिशा में आवश्यक निर्देश प्राप्त किए जाएंगे।
कौन हैं पौलोमी पाविनी शुक्ला?
पौलोमी शुक्ला न केवल एक अधिवक्ता हैं, बल्कि उन्होंने अनाथ बच्चों की स्थिति पर गहन शोध कर ‘Weakest on Earth – Orphans of India’ नामक पुस्तक भी लिखी है, जिसे Bloomsbury ने प्रकाशित किया है। उनके प्रयासों के बाद कई राज्य सरकारों ने अनाथ बच्चों के लिए आरक्षण जैसी योजनाएं शुरू की हैं। उनके कार्य को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा गया है और उन्हें Forbes 30 Under 30 की सूची में शामिल किया गया है।
UNICEF के अनुसार भारत में 2 करोड़ से अधिक अनाथ
यूनिसेफ के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में करीब 2 करोड़ अनाथ बच्चे हैं। लेकिन अभी तक इनकी कोई आधिकारिक गिनती नहीं की गई है। ऐसे में यह निर्णय इन बच्चों की आवाज़ को मुख्यधारा में लाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है।







